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जीवन संवर जाएंगे

 अपनी खुशियां हम सब कुछ इस तरह से मनाएंगे सोचें भला करें भला और किसी के काम आएंगे । अपना पेट तो यूं खुद ही भर लेते हैं पशु पक्षी भी  मनुज वो ही होंगे जरूरतमंदों के जो काम आएंगे । अगर निस्वार्थ रहकर कोई करे सेवा किसी का तो भला खुद आप ही होगा सदा प्रसिद्धि जग में पाएंगे । जो सड़कों पर भटकते यूं ही हर पल भूख से लड़ते सहारा जो बना कोई अकेले आप जीवन संवर जाएंगे । मुसीबत की घड़ी में जो किसी का आसरा हो जाए उनकी अगली पीढ़ी भी सद्गुणों से भर ही जाएंगे । ✍ आचार्य गोपाल जी उर्फ आजाद अकेला बरबीघा वाला

कमाल करती हो

  तुम भी मेरी जां कमाल करती हो  मेरे ख्यालों में भी बवाल करती हो बिना मिले ही मुझसे कभी-कभी जाने कैसा-कैसा सवाल करती हो ।  जागते हुए भी सोया रहता हूं मैं  तुम ख्वाबों में भी बेहाल करती हो । तेरी खुशी के लिए मैं मुस्कुराता हूं तू खुशी में भी चेहरा लाल करती हो । हर रोज नए नुस्के मुझ पर ही  तुम तो सदा इस्तेमाल करती हो । मैं तो अकेला मस्त मलंग था मगर बांधकर बंधनों में आजाद करती हो । तेरी अदा भी अजीब निराली है जाना दिल मिला कर तूँ आंखें आड़ करती हो । हरकतें हमेशा तुम अजीब करती हो कभी मुझे या गैर को खुशनसीब करती हो । आचार्य गोपाल जी उर्फ आजाद अकेला बरबीघा वाले

हे माँ आदिशक्ति

 हे माँ आदिशक्ति हे मां आदिशक्ति हम पर कृपा कर दीजिए,  हम सब है तेरे ही बालक अपनी शरण में लीजिए, हे मातृ ममतामयी  हम पर उपकार ये कर दीजिए, रोग शोक संताप हर कर निश्चिंत हमें कर दीजिए,  राग द्वेष को दूर कर प्रेम अंतर भर दीजिए , दूर कर बाधा विघ्नों को निष्कंट पथ दीजिए, नवरात्रि में नव रूप धरकर नूतन हमें कर दीजिए, हे मातु ममतामयी मुझ मूरख मतिमंद को ज्ञान चक्षु दीजिए, हे प्रथम दिवस की शैलपुत्री अडिग मुझे कर दीजिए, ब्रह्मचर्य भाव मन में मेरे ब्रह्मचारिणी भर दीजिए,  हे चंद्रघंटा चंचला चरित्र निर्मल कर दीजिए, कुष्मांडा कुमार्ग से हटाकर अपने शरण में लीजिए, हे स्कंदमाता कात्यायनी हम पर कृपा कर दीजिए, नाश करके काल का कालरात्रि कंचन हमें कर दीजिए, हे महागौरी सिद्धिदात्री सर्व सिद्धि हमें भी दीजिए, आजाद अकेला आया शरण कुछ तो दया कर दीजिए, आचार्य गोपाल जी उर्फ आजाद अकेला बरबीघा वाले

लगा ला माय चरण अप्पन

लगा ला माय  चरण अप्पन लगा ला माय  चरण अप्पन हम्मर उद्धार हो जइतइ । किरपा कर दा मइया हमरा पर त बेरा पार हो जइतइ । जग जननी जगदंबा शक्ति के दाता मइया तू नजरिया फेर हमरा पर जीवन उजियार हो जइतइ लगा ला माय...............। हइ जगत के पालिका मइया प्रलय क्षण में करे  मइया अगर चाहे तू मइया तऽ जगत विस्तार हो जइतइ लगा ला माय...............। ज्ञान के देवी तू ही हा बचन के शुद्धि करता तू दया कर मइया हमरा पर चकमक संसार हो जइतइ लगा ला माय...............। तू ही मइया मायाधारी  तू ही हऽ लक्ष्मी लीलाधारी  अकेला आश तोरे पर  जे तोहर दीदार हो जइतइ लगा ला माय  चरण अप्पन हम्मर उद्धार हो जइतइ ।  आचार्य गोपाल जी उर्फ आजाद अकेला बरबीघा वाले