याद उन्हें तुम हर पल करना

 याद उन्हें तुम हर पल करना 


याद उन्हें तुम हर पल करना जो मौत से भी लड़ रहे हैं

निज सुखों को कर न्योछावर प्राण मनुज का गढ़ रहे हैं 

जब कभी भी आई आफत हमने स्वयं को लिया छुपा

वो अस्पतालों में कभी तो कभी सीमा पर लड़ रहे हैं 

नित प्रात: संध्या सह सदा वो धूप छांव पानी पत्थर

देश रक्षा के लिए बन निर्भय तन पर खाकी धर रहे हैं

हर‌ तरफ की गंदगी का करने सफाई स्वच्छताकर्मी सदा

उठ सवेरे ले हाथ झाड़ू और गाड़ी घर-घर गुजर रहे हैं 

शिक्षक सदा-ही ज्ञान का सागर सभी को हैं देते पीला

करके होम निज सुखों का का नूतन समाज वह गढ़ रहे हैं


आचार्य गोपाल जी उर्फ आजाद अकेला बरबीघा वाले

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